Skip to main content

Posts

Sasaram Somnath Mandir Grand Opening

इस कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की बैकुंठ चतुर्दशी आज अति महत्वपूर्ण रही, पूज्य गुरुदेव महायोगी पायलट बाबाजी के अथक प्रयास और मेहनत का फल रहा कि, पूर्वोत्तर की इस पावन भूमि पर 'पूर्वोत्तर सोमनाथ मंदिर ' का भव्य लोकार्पण किया गया। जिसमें महान संतो, महात्माओं व आचार्य शामिल रहें - स्वामी आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि जी (जूना अखाड़ा ),आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशा नन्द गिरि जी(निरंजनी अखाड़ा ), आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी जी (किन्नर अखाड़ा ), महामंडलेश्वर योगामाता केको आइकवा जी (जापान), महामंडलेश्वर अर्जुन पूरी जी महाराज, स्वामी रामदेव बाबाजी, स्वामी चिदानंद सरस्वती जी, महामंडलेश्वर चेतना गिरि माताजी, महामंडलेश्वर विष्णु देवा नन्द जी (रूस ), महामंडलेश्वर आनद लीला माताजी, महामंडलेश्वर यतेन्द्रनन्द गिरि जी, महामंडलेश्वर शैलशानन्द गिरि जी महाराज, महामंडलेश्वर अरुण अवदूध जी, सत गुरु कृष्णानन्द जी महाराज, श्री सत प्रभु जी (रूस ) सभी ने अपने आगमन से इस लोकार्पण समारोह को सफल बनाया,जो स्वयं दिन रात अपने अपने प्रयासों से समाज, राष्ट्र व विश्व कल्याण हेतु क्रियाशील...

World Peace: Sankalp

विश्व शांति, समाज कल्याण व राष्ट्र निर्माण हेतु प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष भूमिका निभाने वाले हमारे साधु ,संत, संन्यासी, मुनि, योग गुरु व आचार्य हैं। यही वे लोग है जो अपनी ऊर्जा से विभिन्न क्षेत्रों के कल्याण हेतु बड़ी भूमिका निभा रहें हैं। चाहें वह राजनैतिक क्षेत्र हो या सामाजिक, वास्तीवक रूप से इन्हीं की ऊर्जा से राजनेता व सामाज सेवक वृहदता के साथ देश और समाज में परिवर्तन ला रहें हैं। साथ ही प्रत्यक्ष रूप से ये योग, आयुर्वेद और लेखनी को माध्यम बना विश्व को सही दिशा देने में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। बस कुछ ही दिनों पूर्व 'हरी की नगरी' 'हरिद्वार' में ऐसे ही मुनि, आचार्य और संतो का समागम रहा, जहाँ जूना अखाड़े के प्रमुख आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी (पंच दस नाम,जूना अखाड़ा ),परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष व संस्थापक स्वामी चिदानन्द जी(मुनिजी ) , विश्व के प्रमुख आयुर्वेद आचार्य बालकृष्ण जी और देश व विदेश में जन-जन तक योग को पहुंचने वाले स्वामी रामदेव जी से भेट का सुअवसर प्राप्त हुआ।साथ ही देश विदेश से आये सन्यासियों का भी सहयोग प्राप्त हुआ। इस ...

Birthday greetings to Babaji

ओम् नमो नारायण। 🙏 महान पुरुष का जन्म दिवस भी किसी उत्सव से कम नहीं । ऐसे ही महान पुरुष का जन्म इस धारा पर 15 जुलाई 1936 को रोहतास जिला सासाराम के एक राजघराने में हुआ , इस युग के विश्व विख्यात आध्यात्मिक गुरु महायोगी पायलट बाबा जी के रूप में। संन्यास से पूर्व कपिल सिंह के नाम से जाने जाने वाले बाबाजी का घर पर प्यार का नाम 'ललन' रहा। दार्जलिंग से स्कूली शिक्षा पूर्ण कर सन 1957 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से जैविक रसायन विज्ञान में मास्टर डिग्री प्राप्त की। देश भक्ति की भावना बचपन से ही उनके रगो में रहीं, यहीं वजह थी की उन्होंने भारतीय वायु सेना को प्राथमिकता दि जबकि कई और सुनहरे विकल्प उनकी राह देख रहें थे... भारतीय वायु सेना में उन्होंने अपने शौर्य, बहादुरी व राष्ट्र भक्ति का परिचय वर्ष 1962 के चीन-भारतीय युद्ध, 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में दिया , जिसके परिणाम स्वरुप भारत सरकार ने उन्हें 'वीर' और 'शौर्य' चक्र से सम्मानित किया। कहा गया है की- एक छोटी सी घटना जीवन के बहाव को मोड़ देती है, ऐसी ही एक घटना ने पूज्य बाब...

Mataji on Yoga Day

योग का बढ़ा ही साधारण अर्थ हैं - 'जुड़ाव'। पतंजलि सुत्र में भी -" युजत्य अनेन इति योग :।। " अर्थात.. योग जुड़ने की प्रक्रिया है। यदि हम इस संसार व सृष्टि का ध्यानपूर्वक अवलोकन करें तो सूक्ष्म से लेकर वृहद तक सब 'योगमय' हैं। योग की अनुपस्थिति में न तो यहाँ संसार व सृष्टि संभव है और न ही इनका क्रियाकल्प। सृष्टि का मूल आधार 'शिव और शक्ति' व 'पुरुष और प्रकृति' का मिलन 'योग' है। यदि संसार को देखें तो संसार में प्रतेक जीव की एक दूसरे पर निर्भरता 'योग' है। उदाहरण - वृक्ष से प्राप्त ऑक्सीजन मनुष्य जीवन का आधार है तो वही मनुष्य द्वारा निकासित कार्बन वृक्षों का आधार 'योग' ही है। मनुष्य, पशु, पक्षी,नदी, पहाड़ का एक दूसरे से जुड़ाव 'योग' ही है। ये मनुष्य शरीर भी स्वयं 'पंचभूतों' और 'इन्द्रियों' के योग का परिणाम है। इस सृष्टि की संचालन प्रक्रिया में मौजूद 'सत' , 'रज' , 'तम' गुणों का समनव्यय 'योग' ही है। इन्हें ही आज की आधुनिक वैज्ञानिक भाषा में 'इलेक्ट्रान' , ...

Happy Buddha Purnima: Shraddha Mata

बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष :- महात्मा बुद्ध केवल एक महान आत्मा व संत नहीं बल्कि सोच है,विचार है,ज्ञान है,विश्वास है, श्रद्धा है, प्रेम है।एक सकारात्मक ऊर्जा है।सत्य की खोज है। सिद्धार्थ गौतम शाक्यमुनि से गौतम बुद्ध तक की यात्रा है। सिद्धार्थ गौतम का जन्म एक राज परिवार में राजकुमार के रूप में वैशाख पूर्णिमा के दिन 563 ईसा पूर्व में हुआ। एक राज परिवार में जन्म लेने के बावजूद सिद्धार्थ सुख सुविधा व घर परिवार को त्याग सत्य के मार्ग का पालन करने हेतु वन में एक तपस्वी के रूप में जीवन यापन करते हुए बुद्धत्व को प्राप्त हुए। माना जाता है कि जब उनका जन्म हुआ तब एक साधु द्वारा भविष्यवाणी की गई कि आगे जाकर यह बालक या तो एक महान राजा या फिर संत बनेंगे।जो पूरी दुनिया में मानव कल्याण के लिए ज्ञान के प्रकाश से बदलाव लाएंगे अपने जीवन यात्रा में महात्मा बुद्ध ने अपने अनुयायियों को तीन प्रमुख सिद्धांत सिखाएं- * अहंकार का त्याग है * दूसरों से घृणा ना करें * क्रोध का त्याग करें  उनके द्वारा प्रद्त शिक्षा केवल आध्यात्मिक जीवन जीने की प्रेरणा नहीं देती बल्कि संपूर्ण जीवन में कर्तव्य को कैसे संतु...

Happy Hindu New Year: Shraddha Mata

हिन्दू धर्म में नवरात्रि का अपना महत्व हैं एवं साधना की दृष्टि से इसका महत्व कई अधिक बढ़ जाता हैं.. प्रति वर्ष ग्रहों की विशेष स्थिति को देखते हुए हमारे ऋषि मुनिओं द्वारा वर्ष में चार नवरात्रि मनाये जाने की परम्परा दी , इनमें से दो गुप्त नवरात्रि तंत्र साधकों के लिए व दो नवरात्रि सार्वजानिक रूप से सभी के लिए होती हैं। इन्हीं में चैत्र नवरात्रि का आरंभ हिन्दू पंचाग के प्रथम माह चैत्र से होता हैं एवं हिन्दुओं का नववर्ष भी इसी दिन मनाया जाता हैं...  नवरात्रि 'शक्ति' की उपासना हैं। शक्ति क्या हैं..? शक्ति गति हैं, बल हैं, ऊर्जा हैं। समस्त ब्रह्माण्ड में व्याप्त जो ऊर्जा हैं वहीं 'शक्ति' हैं, मनुष्य शरीर में जो ऊर्जा गतिमान है वह 'शक्ति' है। सृष्टि का संचालन भी इसी से हैं और विनाश का कारण भी यहीं शक्ति हैं। सूक्ष्म से लेकर वृहद तक शक्ति सर्वत्रव्याप्त हैं। वर्ष में ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण यह ऊर्जा अपने शिखर पर होती हैं अतः इसी समय को सदुपयोग हेतु ऊर्जा व शक्ति के विभिन्न रूपों कों नवरात्रि के स्वरूप में उपासना की जाती हैं एवं मूर्त रूप में शक्ति की ...

Happy Holi! Shraddha Mata

सनातन धर्म से जन्मी भारतीय संस्कृति में त्यौहार और उत्सवों का अपना विशेष ही महत्व हैं.. हमारी संस्कृति को यदि त्यौहारों व उत्सवों की संस्कृति भी कहीं जाये तो गलत नहीं होगा। भारतीय संस्कृति में मनाया जाने वाला प्रतेक पर्व और त्यौहार धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता हैं, इन्हीं त्यौहारों में फाल्गुन माह की पूर्णिमा पर होली का उत्सव मनाया जाता हैं।  होली को रंगों का त्यौहार है, जैसे ईश्वर ने इस संसार में प्रकृति में विभिन्न रंगों की छटा विखेरी है उसी प्रकार होली का उत्सव हमें संदेश देता हैं की जीवन है तो संघर्ष हैं.. उतार -चढ़ाव भी हैं, सुख भी है दुख भी है परंतु हमें जीवन को साक्षी बना कर चलना होगा, जीवन के सभी पहलुओं को रंगों के रूप में ग्रहण करते हुए खुशहाली पूर्वक जीने की सीख हमें ये रंगों का त्यौहार ही देता हैं।   पौराणिक कथाओं के अनुसार होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता हैं, विष्णु पुराण के अनुसार होली का उत्सव मनाये जाने के पीछे राजा हिरण्यकश्यप और उसका विष्णु भक्त प्रहलाद और राजा हिरण्य की बहन होलिका की कहानी प्रचलित है...