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Mataji on the significance of Yajna.

  Mataji performing Mahahuti in Dasmahavidya Yajna भारतीय दर्शनशास्त्र तथा धार्मिक ग्रंथो मैं यज्ञ की प्रक्रिया को विश्व मैं शांति स्थापित करने का प्रमुख साधन माना गया हैं ...    यज्ञ एक प्रकार का एक विज्ञान हैं , जिस प्रकार अमुक स्वर - विन्यास से युक्त शब्दों की रचना करने से अनेक राग - रागनियां बजती हैं और उनका प्रभाव सुनने वालों पर विभिन्न प्रकार का होता है ...... उसी प्रकार यज्ञ के दौरान ब्रम्हांड की समस्त शक्तिओ का आवाहन   कर .. मंत्रउच्चारण के साथ उत्पन्न हुई विशिष्ट प्रकार की ध्वनि तरंगो का प्रभाव   विश्वव्यापी प्रकृति , सूक्ष्म जगत तथा प्राणियों के स्थूल और सूक्ष्म शरीरों पर पड़ता हैं ... तथा ये शक्ति और ध्वनि आकाश मैं व्याप्त हो कर लोगों के अंतकरण को सात्विक एवं शुद्ध बनाती हैं ... ऋषियों ने " अयं यज्ञो विश्वस्य भुवनस्य नाभिः " ( अथर्ववेद 9.15.14) कहकर यज्ञ को संसार की सृष्टि का आधार बिंदु कहा है। यज्ञ का एक प्रमुख उद्देश्य धार...